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    विष्णुपद के बारे मे

    बिहार राज्य की राजधानी पटना से गया शहर 100 कि0 मी0 दूर अवस्थित है | ऐतिहासिक रूप से गया प्राचीन मगध साम्राज्य का हिस्सा था | यह शहर फल्गु नदी के तटपर अवस्थित है और हिंदुओं के लिए मान्य पवित्रतम स्थलों में से एक है | तीन पहाड़ियॉं मंगलागौरी, सृंग स्थान , रामशिला और ब्रह्मयोनि इस शहर को तीन ओर से घेरती है | जिससे इसकी सुरक्षा एवं सौंदर्या प्राप्त होता है | गया महान विरासत एवं ऐतिहासिक को धारण करने वाला एक प्राचीन स्थान है गया शहर को देश एवं बिहार के मुख्य शहरों से जोड़ने के लिए विभिन्न प्रकार के यातायात के साधन हैं |
    गया सिर्फ़ हिंदुओं का ही नहीं वरण बौद्धों का भी पवित्र स्थान है | गया में कई बौद्ध तीर्थ स्थान हैं | गया के ये पवित्र स्थान प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं | जिनमें से अधिकांश भौतिक सुविधाओं के अनुरूप है | फल्गु नदी के तट एवं इस पर स्थित मंदिर सुन्दर एवं आकर्षक हैं | फल्गु नदी के तट पर स्थित पीपल का वृक्ष जिसे अक्षयवट कहते हैं, हिंदुओं के लिए पवित्र है | यह वृक्ष अपनी दिव्यता की वजह से पूजा जाता है |
    मंगला गौरी मंदिर में भगवान शिव की प्रथम पत्नी के रूप में मान्य सती देवी की पूजा की जाती है | यहाँ स्थित दो गोल पत्थरों को पौराणिक देवी सती के स्तनों का प्रतीक मानकर हिंदुओं के बीच पवित्र माना जाता है | गया का सबसे आकर्षक स्थल विष्णुपद मंदिर है | यह फल्गु नदी के तट पर स्थित है और इसमें बेसाल्ट पत्थरों पर भगवान विष्णु के चरण चिन्ह खुदे हैं | लोगों की मान्यता है की भगवान विष्णु ने यहीं पर गयासुर की छाती पर अपने पैर रख कर उसका वध किया था |
    प्राचीन विष्णुपद मंदिर को बाद में इंदौर की रानी अहिल्याबाई ने 18वीं सदी में पुननिर्मित कराया | हिंदू विष्णुपद स्थित चरण चिन्हों को भगवान विष्णु का जबकि बौद्ध इन्हें भगवान बुद्ध के चरण चिन्ह के रूप में मान्यता देते हैं | यह मंदिर यहाँ का सबसे मुख्य धार्मिक तीर्थस्थल है |
    गया शहर के नामकरण के पीछे यह मान्यता है की यहाँ भगवान विष्णु ने एक द्वन्द में गयासुर का वध किया था | यह शहर इतना पवित्र है कि यहाँ स्वयं भगवान राम ने अपने पितरों का पिंडदान किया था | प्राचीन ग्रंथों में वर्णन है कि भगवान राम अपने पूर्वजों को मोक्ष प्रदान करने क लिए गया आए थे और देवी सीता भी उनके साथ थी | गया बुद्ध के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है क्योंकि यही वह स्थान है जहाँ भगवान बुद्ध ने 1000 ग्रामवासियों को जो अग्नि पूजक थे जो आदित्यपर्याय सूत्र का उपदेश दिया था | बुद्ध के उपदेश का प्रभाव था की भी लोगों ने बौद्ध धर्म को अपना लिया था |

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