1977 के बाद बनी 138 राज्य सरकारों में 40 गठबंधन की, इनका औसत कार्यकाल 26 महीने से भी कम रहा
नई दिल्ली.महाराष्ट्र और हरियाणा में चुनाव नतीजे घोषित हुए 10 दिन से अधिक का समय बीत चुका है। भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा में जननायक जनता पार्टी (जजपा) के साथ गठबंधन कर एक बार फिर से सरकार बना ली है, लेकिन महाराष्ट्र में शिवसेना और भाजपा गठबंधन अभी तक सरकार नहीं बना सका है। इसमें शिवसेना की ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद की मांग रोड़ा बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो दोनों पार्टियों के अड़ियल रुख के चलते प्रदेश में एक साल बाद फिर से चुनाव हो सकते हैं। यह पहला अवसर नहीं है जब किसी राज्य में सरकार बनाने को लेकर गठबंधन के बीच पद और विभागों के लिए सौदेबाजी हो रही है और स्थायी सरकार को लेकर संकट खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार 1977 से लेकर 2018 तक 138 राज्य सरकारों का गठन हो चुका है, इनमें से 40 सरकारें गठबंधन की थी, जिनका औसत कार्यकाल 26 महीने से भी कम रहा। यही हाल केंद्र की सरकारों का भी है। यहां पर भी 1989 के बाद से लगातार गठबंधन की ही सरकारें रहीं। वर्ष 1996 में तो बीजेपी की सरकार केवल 13 दिन तक ही चल पाई। गठबंधन की इस राजनीति ने देश को कई चकित करने वाले फैसलों का साक्षी बनाया।
सरकार बनाने के लिए जहां भाजपा और वामदलों जैसे धुर विरोधी भी गले मिले वहीं जम्मू-कश्मीर में पीडीपी और बीजेपी के रूप में सबसे बेमेल सरकार भी गठबंधन की ही देन थी। रामविलास पासवान जैसे कुछ नेताओं को गठबंधन की सरकारों के चलते राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। यह गठबंधन की राजनीति का ही कमाल था कि निर्दलीय विधायक होने के बावजूद मधुकोड़ा झारखंड के मुख्यमंत्री बने। यूपीए गठबंधन के दौरान वह 2006 से 2008 के बीच मुख्यमंत्री रहे। निर्दलीय विधायक रहते हुए मुख्यमंत्री बनने वाले वे भारत के तीसरे नेता थे। सत्ता के लालच में बने गठबंधनों का जमकर दुरुपयाेग भी हुआ। 1993 में नरसिम्हा राव सरकार में सांसदों को रिश्वत देने का मामला हो या फिर संसद में नोट उछालने का। गठबंधन के चलते कमजोर सरकारों को बचाने के लए इस तरह के हथकंडे अपनाए जाते रहे हैं। इसमें सांसदों-विधायकों की खरीद फरोख्त भी की गई।
सबसे पहला : केंद्र में 1977 तो राज्य में 1967 में बनी पहली गठबंधन सरकार
भारत में यदि गठबंधन सरकार के इतिहास की बात करें तो वर्ष 1977 में मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार केंद्र में बनी थी, जिसमें कुल 13 दल शामिल थे। यह पहली गैर कांग्रेसी सरकार थी। वहीं यदि राज्य में गठबंधन की बात करें तो आजादी के 20 वर्ष बाद 15 मार्च 1967 में पश्चिम बंगाल में पहली संयुक्त मोर्चे की सरकार बनी थी। हालांकि कुछ जानकार 1953 में आंध्रप्रदेश में गठित संयुक्त मंत्रिमंडल को राज्य स्तर पर पहला गठबंधन मानते हैं। यह मंत्रिमंडल 13 महीने में विघटित हो गया था। इसी तरह 1957 में उड़ीसा राज्य में भी गठबंधन हुआ जो अपना कार्यकाल पूरा करने के पहले ही 1961 में बिखर गया। हालांकि इन्हें आधिकारिक गठबंधन नहीं माना गया।
सबसे बेमेल: राजनीति के दो ध्रुव पीडीपी-बीजेपी ने बनाई सरकार
भारतीय राजनीति में यदि सबसे बेमेल गठबंधन की बात की जाए तो जम्मू-कश्मीर में 2015 में बनी बीजेपी और पीडीपी की सरकार है। सैद्धांतिक और वैचारिक रूप से धुर विरोधी होते हुए भी दोनो पार्टियों ने मिलकर राज्य में सरकार बनाई। हालांकि धारा 370 जैसे मुद्दे और स्टेट के दर्जे को लेकर दोनों में विरोध हुआ और सरकार धराशायी हो गई।
सबसे बड़े महारथी: वर्तमान में पासवान हैं गठबंधन राजनीित के मौसम विज्ञानी
वर्तमान राजनीति में लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) सुप्रीमो रामविलास पासवान का गठबंधन की राजनीति में नाम सबसे आगे है। सन 2000 में जेडीयू से अलग होने के बाद उन्होंने लोक जनशक्ति पार्टी का गठन किया था। इसके बाद वे एनडीए सरकार में शामिल हो गए। 2002 में गुजरात दंगों के मामले में एनडीए से नाता तोड़ा। 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में मनमोहन सरकार में शामिल हुए। 2009 में कांग्रेस से हटे। 2010 में लालू यादव ने राज्यसभा पहुंचाया। 2014 और 2019 में केंद्र की भाजपा सरकार में फिर मंत्री बने।
सबसे सफल: पश्चिम बंगाल, केरल और महाराष्ट्र में सबसे अधिक सफल रहे गठबंधन
15 मार्च 1967 को पश्चिम बंगाल में संयुक्त मोर्चे के रूप में साथ अाए यूनाइटेड लेफ्ट इलेक्शन कमेटी और यूनाइटेड लेफ्ट फ्रंट को भारतीय राजनीति का सबसे सफल गठबंधन माना जाता है। केरल में 1960 में कांग्रेस ने प्रजासोशलिस्ट पार्टी के साथ गठबंधन कर सरकार बनाई। तब से आज तक यहां गठबंधन की सरकारों के बनने का दौर जारी है। महाराष्ट्र में भाजपा ने 1995 में शिवसेना के साथ गठबंधन किया।
जब गठबंधन के लिए साथ आए धुर विरोधी
1989 के आम चुनावों में कांग्रेस पार्टी की हार हुई। बहुमत नही होने के कारण वह विपक्ष में बैठी। जनता दल और अन्य क्षेत्रीय दलों को मिलाकर बनाए गए राष्ट्रीय मोर्चे ने सरकार बनाई। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि भाजपा और वाममोर्चे के समर्थन के आधार पर यह सरकार बनी थी। 1987 के मार्च-अप्रैल से लेकर अक्टूबर-नवंबर तक दोनों दल एक दूसरे का अस्तित्व समाप्त करने पर तुले थे। 1989 के बाद से केंद्र में अब तक 12 सरकारें बन चुकी हैं। राज्य में एक-दूसरे के धुर विरोधी माने जाने वाली बहुजन समाजवादी पार्टी और समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में 2014 में गठबंधन कर चुकी हैं।
डॉ. राममनोहर लोहिया को कहा जाता है भारतीय राजनीति में गठबंधन का जनक
प्रसिद्ध समाजवादी राममनोहर लोहिया को आजादी के बाद भारतीय राजनीति में गठबंधन का जनक माना जाता है। 1960 के दशक में लोहिया ने "गैर कांग्रेसवाद' की राजनीति विकसित की थी और विपक्ष को कांग्रेस के खिलाफ एकजुट किया। 1962 के चुनाव के बाद लोहिया ने सबको साथ लाना शुरू किया। उन्होंने एक ऐसा दृष्टिकोण दिया जिसके पीछे नेता खड़े नजर आए। 1950 के दशक के मध्य से लोहिया ने "आदर्शवादी राजनीति" को अपनाया, जिसके बाद उन्होंने अपने सदस्यों के लिए श्रेष्ठ ईमानदारी की शर्त रख कर पार्टी में शामिल किया।
छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य जहां आज तक नहीं बनी गठबंधन की सरकार, झारखंड इसी के भरोसे
- आजादी के पहले सन 1946 में अंतरिम सरकार बनाई गई थी। यह एक गठबंधन सरकार थी।
- मार्च 1977 से जून 1979 (857 दिन) तक केंद्र में पहली गैर कांग्रेसी गठबंधन सरकार मोरार जी देसाई ने बनाई।
- झारखंड एक ऐसा राज्य है जहां हमेशा गठबंधन सरकार रही।
- छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है जहां पर कभी भी गठबंधन से सरकार नहीं बनी।
- 1989 से 2009 तक सात ऐसे चुनाव हुए जिसमें किसी भी एक दल काे लोकसभा में बहुमत नहीं मिला। सभी सरकारें गठबंधन की बनीं। कोई भी सरकार कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी।
आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
from Dainik Bhaskar /national/news/government-in-maharashtra-even-10-days-after-election-results-01678017.html