वीरकुंवर सिंह की गौरवमयी नगरी
कलेक्ट्रेट घाट का इतिहास आजादी से भी पहले का है। सन् 1857 के महानायक वीर बाकुंडे बाबू वीर कुंवर सिंह व इंग्लैंड के राजा जॉज पंचम के आगमन से भी घाट का जुड़ाव है। इसका निमार्ण अंग्रेजों ने सैरगाह के लिए किया था। अंग्रेज अफसरों की गोरी मेम यहां आकर आराम फरमाती थीं। इंग्लैंड की ठंड के अभ्यस्त अंग्रेजों ने अपनी सुविधा के लिए मध्य प्रदेश से आने वाली सोन नदी को तत्कालीन नहर प्रणाली से कलेक्ट्रेट तालाब को जोड़ा था। पहले इस तालाब सालों भर पानी रहता था। साल 1918 में स्थापित बिहार के इकलौते अश्वारोही सैन्य बल के घोड़े यहां पानी के लिए आते थे।
पार्क और तालाब किनारे बैठना जिलेवासियों का आज भी है फेवरेट टाइमपास
कलेक्ट्रेट तालाब
वीकेएसयू पार्क फेवरेट स्पॉट
राष्ट्रपति ज्ञानी जैल से किया था अनावरण
वीर कुंवर सिंह पार्क रमना मैदान में अवस्थित है। पार्क की महत्ता का अंदाजा इससे लगा सकते हैं, कि यह सन् 1857 के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी वीर कुंवर सिंह के नाम पर है। तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने 8 दिसंबर 1983 को पार्क में सिंह की स्मारक प्रतिमा का अनावरण किया था।
आरा स्टेशन का सौंदर्यीकरण, रांची तक ट्रेन
विकास के मामले में रेलवे आगे रहा। स्थापना के बाद से यहां आरा-सासाराम रेल लाइन बनने के साथ पटना-मुगलसराय मार्ग पर कई नये स्टेशनों व हाल्टों का निर्माण हुआ। आरा-मोहनिया रेलवे लाइन बनने की भी संभावना दिखने लगी है। आरा से रांची, पटना और सासाराम के लिए कई नई ट्रेनें मिलीं। वाशपीट व नए प्लेटफार्म बन रहे हैं।
रेलवे में मिलीं कई सुविधाएं