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    शहर के 80 फीसद निजी अस्पताल का शटर बन्द,आम आदमी इलाज के लिए परेशान, इंजेक्शन लगाने को भी तैयार नहीं

    कौशलेंद्र, शेरघाटी 
    शेरघाटी अनुमंडल अस्पताल में एंटीजन किट से कोरोना जांच की रिपोर्ट में संक्रमण की संख्या जैसे-जैसे बढ़ती जा रही है। शहर में महामारी का दहशत बढ़ता जा रहा है। अब शहर में इलाज करने वाले निजी चिकित्सक हों या उनके सहायक स्टाफ एक इंजेक्शन लगाने को तैयार नहीं हैं। बुधवार को स्थानीय बसंत बाग मोहल्ले के प्रतिमा देवी ने बताया कि चिकित्सक के परामर्श के अनुसार बच्चे को टाइफाइड है। इसको प्रतिदिन इंजेक्शन लेना है। इंजेक्शन दिलाने के लिए कई निजी चिकित्सालयों का चक्कर लगाए। 
    रात दिन सेवा देने की बात कह बड़े-बड़े बोर्ड लगाए नर्सिंग होम और निजी चिकित्सालयों का चक्कर लगाने के बाद भी जब बच्चे को इंजेक्शन नहीं पड़ा तो थक हार कर अपने घर वापस लौट रहे थे।। इसी बीच एक परिचित कंपाउंडर मिले। उनसे अनुनय विनय किया। तत्पश्चात उन्होंने इस करार के साथ इंजेक्शन लगाया कि अगले दिन से व्यवस्था किसी अन्य स्थान पर देख लेंगे। उन्होंने कहा सारा क्लीनिक बंद है। इंजेक्शन नहीं पड़ेगा। गोला बाजार, नारायण कॉलोनी, नई बाजार जैसे मुख्य पथ पर रहने वाले लगभग 80 फ़ीसदी चिकित्सालयों का शटर गिरा हुआ है। ऐसी स्थिति में शहरवासियों में यह चिंता सता रही है कि आखिर कोरोनावायरस ने अलग रूप ले रखा है। अब  दूसरी बीमारी से भी लोगों की जानें जा सकती है। अब सवाल उठने लगा है कि अगर निजी चिकित्सालयों और नर्सिंग होम आदि की यही स्थिति बरकरार रही तो कोरोना से कम दूसरे बीमारी से ज्यादा लोगों की जान जा सकती है। 

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