स्वच्छ, सुंदर व स्वस्थ भारत के निर्माण को सामुदायिक व्यवहार परिवर्तन जरूरी
भोजपुर जिले को खुले में शौच से मुक्ती के स्थायित्व व सामुदायिक व्यवहार परिवर्तन विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शनिवार को संपन्न हुआ। जिला जल व स्वच्छता समिति के तत्वावधान में यूनीसेफ की विशेषज्ञ टीम द्वारा कार्यक्रम का आयोजन विद्या भवन में हुआ। इसमें खुले में शौच से मुक्त के स्थायित्व व सामुदायिक व्यवहार परिवर्तन विषय पर पंचायत प्रतिनिधियों, स्वच्छाग्रही व प्रखंड स्तरीय अधिकारियों और कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। मौके पर डीआरडीए के डायरेक्टर प्रमोद कुमार ने मानव जीवन में स्वच्छता का महत्व व सामुदायिक व्यवहार परिवर्तन को जागरूकता कार्यक्रम की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। वहीं पंचायत प्रतिनिधियों से स्वच्छ, सुंदर व स्वस्थ भारत के निर्माण सहयोग करने पर बल दिया। वहीं ट्रेनर के रूप में यूनिसेफ के मजहर खान,अखिलेश कुमार व दूधेश्वर प्रसाद ने वर्तमान बदलते परिदृश्य में स्वच्छता अभियान के लिए सामुदायिक व्यवहार परिवर्तन हेतु नवीन आधुनिक व वैज्ञानिक पद्धति के अनुरूप कार्य करने को कहा। लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत प्रथम चरण में स्वच्छता संग्राम के तहत जिला को खुले में शौच से मुक्त किया गया। द्वितीय चरण में अब लोगों के व्यवहार में परिवर्तन लाकर उन्हें अपने घरों में निर्मित शौचालय के उपयोग करने व दूसरों को भी इस कार्य हेतु प्रेरित करने की आवश्यकता पर बल दिया। भोजपुर के गांवों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन करा कर उन्हें ओडीएफ प्लस बनाया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों के किसी भी भाग में अपशिष्ट प्रबंधन करने के लिए कचरे का पृथक्करण सबसे अच्छा तरीका है। विशेष रूप से गांव के लिए सूखे और गीले कचरे को अलग कर खाद बनाया जा सकता है। सूखे कचरे के लिए गांव जिला प्रशासन से संपर्क करके सूखे कचरे को निकटतम कचरा प्रबंधन संयंत्र में पहुंचा सकते हैं जिससे गांव को ओडीएफ प्लस की दिशा में ले जाया जा सकता है।