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गया के चर्चित व्यवसाई बंधु हत्याकांड में पुलिस एक और संदिग्ध को हिरासत में लेकर कर रही है पूछताछ
गया के चर्चित व्यवसाई बंधु हत्याकांड में पुलिस एक और संदिग्ध को हिरासत में लेकर कर रही है पूछताछ
संवाद सहयोगी, शेरघाटी
इमामगंज के बर्तन व्यवसायी ने ही व्यवसायी बन्धुओं की हत्या करायी। गया के चर्चित बर्तन व्यवसाई बंधु हत्याकांड के आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज कर दी गई है। गुरुवार को इस मामले में पुलिस ने एक और संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। अनुमंडल पुलिस उपाधीक्षक रवीश कुमार ने बताया कि चिन्हित अपराधियों के धरपकड़ के लिए इमामगंज के पसेवा, इमामगंज एवं अन्य संभावित स्थानों पर छापामारी की जा रही है। उम्मीद किया जाता है कि निकट भविष्य में हत्यारों की गिरफ्तारी कर ली जाएगी। उन्होंने बताया कि हत्यारों की गिरफ्तारी के लिए एक विशेष टीम गठित कर दी गई है। और रात दिन इस पर निगरानी रखी जा रही है। उल्लेखनीय है कि गया के बर्तन व्यवसाई पंकज कुमार साह एवं चंदन कुमार साव दो सगे भाइयों की हत्या 13 अगस्त की रात अपराधियों ने आमस थाना के हरिदासपुर गांव के समीप इमामगंज शेरघाटी पथ पर गोली मारकर कर दी थी। उसके बाद पुलिस अनुसंधान में जुटी थी। अनुसंधान के क्रम में पुलिस को व्यवसायियों द्वारा ही व्यवसाई की हत्या कराने का तार जुड़ा। जिसके आधार पर इमामगंज के बर्तन व्यवसाई अमरजीत कुमार को गिरफ्तार किया गया। तत्पश्चात मामला परत दर परत खुलता गया और अंततः मामले का उद्भेदन हो सका। इधर सूत्र बताते हैं इमामगंज का आपराधिक गिरोह कुणाल सिंह, सागर पासवान और अमरजीत कुमार साव बालू उत्खनन धंधे से जुड़े थे। रात में कोई बालू का उठाव ना करें। इसके लिए यह लोग रानीगंज इमामगंज पुल के समीप रात्रि समय ड्यूटी पर तैनात रहते थे। इसी क्रम में रात्रि में गुजरने वाले राहगीर के प्रति इनकी नियत खराब हुई। और ये लोग अपराध की दुनिया में प्रवेश कर गया। कई लोगों के साथ छीन झपट कर रुपए, लूटने मोटरसाइकिल छीनने के बाद अपराधियों के गिरोह में शामिल हो गए। अमरजीत पहले भी एटीएम कार्ड से फर्जीवाड़े कर रुपये निकलने के मामले में जेल जा चुका है। इसी तरह लालच बढ़ता गया और बड़ा अपराध को अंजाम देने लगा। उल्लेखनीय हो कि अमरजीत के पिता सहित उसके चार चाचा रानीगंज इमामगंज में बर्तन की दुकान चलाते हैं। बर्तन की दुकान में अमरजीत का आना जाना रहता था। क्योंकि बर्तन दुकान उसके चाचा एवं उसके पिता के थे। व्यवसायी भी माल पहुचाने और तगादा के लिए प्रायः आते रहते थे। जिसके प्रति नियत खराब हुई। योजना बनाया। फिर रुपये के लिए घटना को अंजाम दिया। लेकिन कहा गया है काठ की हांडी बार बार नहीं चढ़ती। हुआ यही। रुपये लूट नहीं सका। अपने व्यवसाय को क्षति तो पहुंचाया ही खुद अब जेल के सलाखों में है। दो व्यवसायियों की हत्या से पूरे व्यवसायी वर्ग में रोष है। सभी उस परिवार को घृणा की नजर से देख रहे हैं। जो भी हो शेष चिन्हित अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद पूरे मामले में पुलिस को कुछ और जानकारी मिल सकती है।
