राजद का टिकट लेकर मंजू अग्रवाल को शेरघाटी में पहुंचते ही उनके समर्थकों ने फूल माला से भव्य स्वागत किया
शेरघाटी विधानसभा चुनाव के लिए राष्ट्रीय जनता दल का सिंबल यानी प्रतीक चिन्ह लेकर पहुंचते ही मंजू अग्रवाल का उनके समर्थकों ने शेरघाटी में भव्य स्वागत किया।टिकट मिलने से समर्थकों में काफी उत्साह देखा गया। श्रीमती अग्रवाल पटना से पहुंचकर सबसे पहले अपने घर के माता पिता समान सास ससुर और बड़ों का आशीर्वाद ली। फिर शहर के गोला बाजार स्थित राम मंदिर में दर्शन पूजन के पश्चात अग्र सेवा मंच के लोगों के द्वारा श्रीमती मंजू अग्रवाल का फूल माला और बुके देकर भव्य स्वागत किया गया। एवं उनके समर्थन में नारे और जयकारे भी लगाए गए। इस अवसर पर मंच के संयोजक अमृत अग्रवाल अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल उपाध्यक्ष दिलीप अग्रवाल के अलावे अशोक अग्रवाल सुबोध अग्रवाल गिरीश चंद्र तायल प्रेमचंद अग्रवाल सहित सैकड़ों लोग शामिल थे। मंजू अग्रवाल ने लोगों के स्वागत से अभिभूत होकर कहा मैं अपनी पूरी क्षमता का उपयोग समाज के हर तबके हर क्षेत्र के समस्याओं के निदान के लिए करुँगी एवं सुन्दर और समरस समाज के निर्माण के लिए सतत संघर्ष करती रहूंगी। उल्लेखनीय हो कि गत बिहार विधानसभा चुनाव 2010 में नए परिसीमन के बाद शेरघाटी विधानसभा क्षेत्र अस्तित्व में आया। शेरघाटी विधानसभा क्षेत्र के अस्तित्व में आते ही स्थानीय उम्मीदवारों ने अपने भाग्य का फैसला करने के लिए जनता के बीच आए। परिसीमन के बाद हुए पहले चुनाव में शेरघाटी से राजद के कद्दावर नेता व तत्कालीन ऊर्जा मंत्री शकील अहमद खान एवं जदयू से विनोद प्रसाद यादव तथा भाजपा के बागी उम्मीदवार के रूप में निर्दलीय प्रत्याशी बनकर सुषमा कुमारी उर्फ मंजू अग्रवाल चुनावी किस्मत आजमाने चुनाव के मैदान में कूद पड़ी। उक्त चुनाव में श्रीमती अग्रवाल ने कठिन परिश्रम करते हुए नंबर दो का स्थान प्राप्त कर अपना राजनीतिक वजूद साबित करने में सफल हुई। और कद्दावर नेता शकील अहमद खान तीसरे नंबर पर पहुंच गए। फिर वर्ष 2015 के चुनाव में स्थितियां कुछ इसी प्रकार रही। किसी भी राजनीतिक दल ने मंजू अग्रवाल को टिकट नहीं दिया। फल स्वरूप एक बार फिर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में कूद पड़ी। और लगभग 25000 वोट प्राप्त कर तीसरे नंबर का हकदार बनी। उक्त दोनों चुनाव में जदयू कोटे से डॉ विनोद प्रसाद यादव विजयी होने में सफल हुए। लेकिन इस बार मंजू अग्रवाल को राजद ने अपना टिकट थमा कर राजनीतिक जमीन तैयार करने की कोशिश में है।
